राकेश कुमार कन्नौजिया की रिपोर्ट
सोनभद्र विंढमगंज थाना क्षेत्र के महुली में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव का शुभारंभ शनिवार की रात भव्य रीति-रिवाजों के साथ हुआ। रामायण एवं मुकुट पूजन के उपरांत मुख्य अतिथि वीरेंद्र चौधरी (मंडल अध्यक्ष विंढमगंज) तथा विशिष्ट अतिथि सेकरार अहमद (जिला उपाध्यक्ष बसपा) ने रिबन काटकर एवं नारियल तोड़कर रामलीला का उद्घाटन किया।
अवसर पर मुख्य अतिथि वीरेंद्र चौधरी ने कहा – “रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणा है। श्रीराम का जीवन चरित्र हमें त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श पालन की शिक्षा देता है। यह मंच हमें हमारी संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखता है।”
विशिष्ट अतिथि सेकरार अहमद ने अपने विचार रखते हुए कहा – “रामलीला भारतीय संस्कृति की जीवंत धरोहर है। यहां से हम सीखते हैं कि सत्य और धर्म की सदैव विजय होती है।”
समिति अध्यक्ष अरविंद जायसवाल ने आए हुए अतिथियों एवं जनसमूह का आभार जताते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन से जोड़ना है।
नारद मोह लीला का मंचन
पहले दिन “नारद मोह” प्रसंग का मंचन किया गया। कथा के अनुसार महर्षि नारद हिमालय पर्वत पर कठोर तपस्या में लीन थे। देवेंद्र को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्हें भ्रम हुआ कि नारद उनका सिंहासन प्राप्त करना चाहते हैं। इंद्र ने उनके तप को भंग करने हेतु कामदेव को भेजा। कामदेव अप्सराओं सहित नारद के समीप पहुँचे और उनके मन में मोह उत्पन्न करने का प्रयास किया।
मोहग्रस्त होने पर नारद राजा श्रृंगी के दरबार में पहुँचे। वहां राजकुमारी की अद्भुत सुंदरता देखकर वे उससे विवाह की इच्छा करने लगे। इसके लिए उन्होंने भगवान विष्णु से सुंदर रूप की कामना की, लेकिन विष्णु ने लीला करते हुए उन्हें वानर का रूप प्रदान कर दिया। जब नारद इस रूप में दरबार पहुँचे तो उपस्थित लोग उनका उपहास करने लगे।
इस छल का भान होने पर क्रोधित नारद ने विष्णु को श्राप दे दिया। बाद में शांति लौटने पर उन्हें अपनी भूल पर गहरा पश्चाताप हुआ। यह प्रसंग मानव जीवन में क्रोध और मोह से उत्पन्न होने वाली भूलों से बचने की सीख देता है।
आगामी मंचन
रामलीला समिति के सचिव राकेश कुमार कन्नौजिया (प्रधानाचार्य, आदर्श इंटर कॉलेज महुली) ने संचालन करते हुए बताया कि रविवार को रामजन्म लीला का भव्य मंचन किया जाएगा।
इस अवसर पर समिति के पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार कन्नौजिया, विंध्याचल प्रसाद कन्नौजिया, दिलगज राम कन्नौजिया, बुधनाथ कन्नौजिया, सत्यनारायण कन्नौजिया, अमानुल्ला, पंकज गोस्वामी, राजनाथ गोस्वामी सहित सैकड़ों दर्शक उपस्थित रहे।







